Wednesday, 22 March 2017

ग़ज़ल / غزل


غزل 

وہ میری جان ہو گئے  ہیں  کیا
جان  ایمان  ہو  گئے  ہیں  کیا

انکی  کوئی خبر کوئی پتا  نہیں
وہ  بدگمان  ہو  گئے  ہیں  کیا

میں نے انکو تو نہیں کہا  بے وفا
وہ   پریشان  ہو  گئے  ہیں  کیا

میرے اشعار  چھپ رہے ہیں ان سے
وہ  بے میان  ہو  گئے   ہیں  کیا  

ان سے ملنے  کی  تمنا  جل رہی
وہ  آسمان   ہو  گئے  ہیں  کیا 



ग़ज़ल 

वो  मेरी जान  हो गए  हैं क्या
जान  ईमान हो  गए हैं  क्या

उनकी कोई ख़बर कोई पता नहीं
वो बदगुमान हो  गए  हैं  क्या

मैंने उनको तो नहीं कहा बेवफ़ा
वो  परेशान  हो गए  हैं क्या

मेरे अशआर छिप रहे  हैं उनसे
वो  बेमियान हो  गए  हैं क्या

उनसे मिलने की तमन्ना जल रही
वो  आसमान हो  गए  हैं  क्या

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