Thursday, 7 May 2015

ग़ज़ल

अब के चाँद की हवा लग लग जाए मुझे 
माँ  की  पुरानी  दुआ लग  जाए  मुझे 

मैंने  खुद पे  शाम  छिड़की  थी  कभी
अब तेरे चेहरे का  ज़िया लग जाए मुझे

मैं  मुश्ताक वो  बेज़ार तो मन  नासाज़
मीर ओ असद की दवा  लग जाए मुझे

कुछ फ़रयाद  टहलती हैं  तेरी आँखों में
मंडराते अल्फाज़ की सदा लग जाए मुझे

बातों बातों  में इश्क़ छुटा  वक़्त गया
अब तो इश्क़ की क़ज़ा लग जाए मुझे

-असरार

اب  کے  چاند کی  ہوا  لگ  جائے  مجھے
ماں  کی  پرانی   دعا  لگ  جائے  مجھے

میں  نے  خد  پہ   شام  چھڑکی   تھی  کبھی
اب تیرے چہرے کا ضیا  لگ جائے مجھے

میں  مشتاق  وہ  بیزار  تو  من   ناساز
میر و  اسد  کی  دوا  لگ جائے  مجھے

کچھ فریاد  ٹہلتی  ہیں  تیری  آنکھوں  میں
منڈراتے  الفاظ کی سدا  لگ جائے  مجھے

باتوں  باتوں  میں  عشق  چھوٹا  وقت  گیا
اب تو  عشق کی  قضا  لگ  جائے مجھے

اسرار

In Roman:

Ab ke chand ki hawa lag jaye mujhe 
Maa ki purani dua lag jaye mujhe 

Maine khud pe sham chhirki thi kabhi 
ab tere chehre ka ziya lag jaye mujhe 

Main mushtaq wo bezar to man nasaz
Meer o Asad ki dawa lag jaye mujhe 

kuch faryad tahalti hai teri aankho mai
mandrate alfaz ki sada lag jaye mujhe

bato bato mai ishq chhuta waqt gaya
ab to ishq ki qaza lag jaye mujhe

Asrar

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